इक राजो तो, वो खुब दयाळु तो। वो रुज जंगल मय जानोवर नेय जुवा जातो,इक दाड़े वो राजो रुज नी तरह वो जंगल मय जानोवर जुवाग्यो। पण जंगल मय असानक अंगास मय वादळु नेय तुपान आवीयो। ते राजा नेय काफी टेंम नकळीग्यो। ते राजो आपड़े मेल मय जवानी वाट भुलिग्यो, नेय जंगल मय भटकतो भटकतो वो खुब थाकीग्यो ते इक बुर ना रुकड़ा ताले जाईने बैटो ते वणी बुर पाय तीन नान सुर आवत दिकीने राजो खुस थयो।

राजे वण सुरने आपड़े पाय हादिने किदु के मने खुब भुख लागी हे, तमे मारे बदले खवानु लावी सको तवणा वो सुर केवा लाग के आमार घेर पायस हे। अटले आमे आबार आमार घेर जाईने तमारे हारु खवानु लावगा। एम कई नेय सुर आपड़े आपड़े घेर जावा लाग नेय थड़ीक वार मय पास आवीय नेय राजा नेय खवानु आलियु ते राजे खवानु खाईने खुब राजी थयो ते सुरने राजे किदु के तमारे जे जुवे वो मारे पाय मागी सको तवणा इक सुरो किदु के मारे इक असली  घेर नेय गाड़ी गुड़ो आलो तवणा राजे किदु के आ मु तने आलीदुगा।

तवणा बीजो सुरे किदु के मु खुब गरीब हुं अटले मने खुब धन आलो तवणा राजे किदु के आ बी तने आलिदुगा। तवणा राजे तीसरा सुरा पुसीयु के बेटा तारे हुं जुवे तवणा वो बुलियो के राजाजी मने ते खाली भणावा नी इच्छा हे, अटले मारे हारु भणवा नी वेवस्ता करी आलो। तवणा राजे बीजा बै सुर हारु वणा नेय धन नेय घेर आलिने तीसरा सुरा हारु भणाई नी वेवस्ता करी आली ते तीसरा सुराने भणाई पुरी थवा वाय वो राजा नेय मन्त्रि बणीग्यो नेय पेलको सुराने घेर नेय गाड़ी गुड़ो खुब साटा पड़ीया ते नदी मय खुब पाणी आवीयु ते सब कुछ तणाईग्यु। बीजो सुरो मोज मस्ती मय पुरा पईसा उड़ाड़ी नेय पासो गरीब बणीग्यो। तवणा तीसरा सुरा पाय वो बै सुरा आवीने केवा लागा के आमे खुब गलती करी आकी अमारे धन नेय घेर सब  कुछ खतम थईग्यु तवणा वो मन्त्रि तीसरो सुरो केवा लागो के आ धन दोलत ते आवतु रे नेय जातु रे नेय खाली भणाई थकी सीख हमेसा आपड़े पाय रेहे इनथकि आपड़े मुटा बी बणी सक ह, तवणा बै सुरा केवा लागा के आमे बी खुब भणाई करगा नेय खुब मेनत करीने आमे बी मुटा आमदी बणगा।

अकल – हिक सब थकी मुटू थन हे।