इक आदमी खुब कंजुस तो वो पुरी दाडा कंजुसी करीने पाँस लाक रुपया भीगा करीया ता। वो विसार करवा लागियो के इक वर तक वो कोई काम निय करेगा निय आराम नी जिन्दगी,जिवेगा।तवणा यमराज ना यमदुत आविया नेय ऐणा कंजुस नेय लई जावा लागिया कंजुस किदु के मु, तमने अरदो धन आलु पण तमे मने पाँस दाडनो जिवा बदले वगत आलो पण यमदुत इकनी, हामली तवणा कंजुस किदु के मने तीन दाडनो वगत आलो खुब पारातना करी पण यमदुत,नी कोई फरक नी पडियो पसे कंजुस  इक दाडनो वगत मागियो पण यमदुत नेय कोई फरक नी पडियो , पण खाली इक कागज लखवानो वगत आलियो।तवणा कंजुस कागद मय लकियु के  कारीये वाईनु निय सुसवानु आपडे पाय कटला भी पईसा, वय पण कोई कामना नी रय। अटले आण दाडमे हर दाडे जिवो

अकल – तरत नु काम तरत करी लेवु जुवे।