सुन्दरपुर गाँम मय इक किसान रहतो तो। एने सार सुरा ता। वो खुब आलसि ता। कोई बी काम निय करता ता। किसान खुब दुकी तो के इने सारे सुरा निय कामना हे। खुब सुसवा लागियो ते किसान इक दाडे खुब बीमार पडिग्यो इने खबर पडी के वो, वदार दाडा थकि जिवी ना सके। अटले इणे सब सुरने हादिने किदु के मुते वदार दाडा निय जिवुगा पण तमने इक राज,नी वात बताडी जु आपडे खेतर मय घणु धन गालियु हे। तमे सब जणा जाई नेय काडी,लावजु पसे वो किसान मरीग्यो। पसे किसान नेत सुरा सब किरीया करम करीने पसे सारे जना खेतर मय ग्या पसे खेतर,मय खुतरवा लागिया पुरु खेतर खुतरी आकियु पण कोई धन नी मलियु पसे वो खुब,री करवा लागिया के आपडे बापे आपडे हाते दगो करीयो हे। पसे वो धान नु बीज वावि आविया ते खुब असलि साटा पडिया ते धान असली थयु, नेय जवना पाकिग्यु ते वाडियु ते धान ना ढकला वलीग्या ते सारे सुरा आपडे बाप नी,वात हमजीग्या के आपडे बापे सई किदु तु।

अकल - मेनत हि सपलता निय कुसी हे।