वाल्मिक बाबाजी घणा डुवा थईग्या ता । इक दाडे आपडा शेलो ने, शिसा आळवा  बदळे इक तरीको सुसीयो नेय बाबाजी रुज शिसा आलवा, नि थाण माते आवी नेय शेला नेय भणावा लागिया। नेय सब शेळा नेय किदु , के तमे सब जणा ई बताडो के मारा मुण्डा मय कटला दात हे। सब शेळा इक इक करी नेय जुवा लागिया सब जणा जुई नेय किदु के , बाबाजी तमारे मुण्डा मय तो दात नी हे। तमारे दात सब पडीग्या हे। तमे ते बुकला हो तवणा बाबाजी किदु के, मारी जिब हे। तवणा सब  जने किदु के  तमारी जिब तो हे। पसे बाबाजी, किदु मारी जिब ते जनम थकी हे पण दात ते वाई आवीया ता। पले हतेग्या पसे बाबाजी किदु के तमने सबने ई वताडवा हादिया हे। मारे जिब जो नरम हे अटले आजे तक हावती हे। पण दात काटा हे । अटले पडीग्या ते आपडा जिवन मय मुटू बणवु वे ते नरम रेवानु जो काटु रया तो जिवन नास थाहे।

अकल - नरम रेवानु मुटू बणवा नी पेसान हे।